• Letter to my children

    I am bereft of words……

  • पुनीत निव निर्माण

    दीप जलाओ,नगर सजाओ,शुभ घड़ी पुनीत है त्योहारउदित सूर्य कर रहा आलोकित अपने राम का दरबार। विशवास को हमारे मिला, अखंड अनोखा वह आधार ,सरयू तीर, विशाल विभूति अपने राम का राज त्योहार । सत्य सनातन वैदिक सपना, हिन्दुत्व हुआ आज साकारएक सूत्र बंध ,करें प्रणाम अपने राम को बारम्बार। साधारण यह मंडप नहीं अपितु आत्म…

  • “मिलन चिरन्तन” 1

    “ अस्थिर हुआ , पल भर कुछ यादों मे,माधव का बेचैन मन, श्याम-घन घिरे थे,फिरभी मुड़कर, चल दिए राधाके वृन्दावन राह तकते,कुजं में ढूढती आँखे,उत्सुक थी किशोरी मिलन। जमुना तट,वट छैया तले देख,पूछा “क्यों प्रिय हो इस हाल में ?” लली कह उढी “आह, श्याम आये आज,फिर हमसे नेह जोड़ने?” प्रेम-आतुर हो झाँका नंदन ने,राधिका…

  • स्थिर चेतना

    अच्छादित  यह आकाश बरसता मुझसे  कह रहाबहने दो थारा जीवन की जिस दिशा यह  बह रहा विधि का विधान बना, सबको  एक दिन पिघलनापंचतत्व की इस रचना को रंगहीन मिट्टी में  मिलना   अंतरमन की पूंजी हो हो या  बहिर मन की हो भावनादान करो स्वेच्छा से सब, लेकर ना कुछ किसी को जाना   …

  • बरखा बावंरी

    वह बरखा बावरी,ओढ़े श्याम चुनकर चल दी!

  • पुनीत नींव निर्माण “

    दीप जलाओ,नगर सजाओ,शुभ घड़ी ,पुनीत है त्योहार,उदित सूर्य कर रहा आलोकित ,अपने राम का दरबार। विशवास को मिला हमारे , अखंड अनोखा वह आधार ,सरयू तीर, विशाल विभूति,अपने राम का हो रहा त्योहार। सत्य सनातन वैदिक सपना, हिन्दुत्व हुआ आज साकार ,एक सूत्र बंध, करें प्रणाम अपने राम को हम बारम्बार। असाधारण यह मंडप ,…