• अहंकार

    अहंकार आत्म हनन कर उगता चित्त में जो विचार ,पंच तत्व काया समझता मानव जीवन-सार,विस्मृृत चेतना कर जब जीवन उलझता माया जाल,बन्धन से तब बांध लेता अहंकार का काल! शमा सिन्हा30 -6 -23

  • “मौन”

    मौन में होता है सन्निहित उत्तर, उठते हर प्रश्नका! जीवन की सभी परिस्थिति,हर तूफान का! छिपि है इसमें शक्ति अपरिमित ,तेज धैर्य का! बोल से ज्यादा अभिव्यक्ति,शौर्य सहनशीलता का! मौन सूचक है, अंतरनमन स्वाभिमान की पराकाष्ठा का! है प्रकाश-ध्वजा अजय यह,आकाश से ऊँचा मनोबल का! शब्द हीन होकर भी विस्मित अभिव्यक्ति है यह स्वमत का!…

  • कृष्ण का विरह

    “कृष्ण का विरह” दिखाए नही जग को कृष्ण ने अपने हृदय के घाव, अबोध उम्र मे छूटे ग्वाल-बाल, ममता भरी छांव,! कर्म – बन्धन में बांध रोक लिया लल्ला नेआंसू अपने, पर मन में बसा कर चल दिए ,यमुना-बालसखा के सपने! पीछे छूटा यमुना तट, विशाल कदम्ब की छैया सूनी, ब्रम्ह होकर भी ना रोक…

  • योग अभ्यास

    अज्ञात का ज्ञान है योगआत्मा से पहचान का संजोग,निरंंतरअभ्यास से कर प्रयोग,अंतर्दृष्टि का नित होता नियोग। अंगों का बनता ऐसा समीकरणशरीर सेआत्मा का दिखता व्याकरण !होता शक्तिशाली जितना आत्म बल।क्षिण होता उतना ही माया का छल। इच्छायें पल पल होती जाती क्षिणविलग तन से आत्म ज्ञान ,बनते जैसे जल और मीन ।मिट जाता क्लेश, पल…

  • रथ यात्रा

    देेखो,चले हमारे कृष्ण ननिहाल !लेकर सबका स्नेह हजार !साथ में हैं बलदाऊ , सुभद्रा।उमंगअटूट हृदय सबके भरा। रथ खींच रही,भक्तन की भीड़ सारी,उमड़ा जन सैलाब, हृदय असुवन से भारी। “रह न जाना कान्हा, लौट घर जल्दीआना!बाट तकत दिन बीतेगा,सूनी होगी रैना! सूना होगा मंदिर, सूनी रहेगी नगरी!तुम रहोगे दूूर,तो कित बजेगी बांसुरी?” शमा सिन्हा20- 6…

  • मां का परिवार

    मेरा परिवार, मेरी ताकत! मेेरी आखें थी नींद से बोझिल,सामने पड़ी खुली किताब थी,सहसा स्नेह स्पर्श,नयन सजल,लेेकर बुलाने आई मेरी मां थी! “कल भी पर्चा देने भूखी ही गई थी।क्या यूहीं जगी आखों से रात काटोगी?चलो,साथ मिलकर दो कौर खालें!”पाकर स्नेह ,मन हुआ ममता के हवाले! वही है नींव,स्थिर चेतना शक्तिपीठ !हर परीक्षा में ,हर…