-
“चांदनी रात”
पग पग मोती लुटाता देखो,आया बन कर सजीला बन्ना चांद गांठ जोड़ ठुमकती आई है दुल्हन नखरीली चांदनी साथ! रात्री ने नभ की नीली चुनरी पहनाई उसमें बुनकर तारों का साज, चार पहर रस्म निभाकर, बन्ना-बन्नी होंगे इक दूजे के आज ! लेकर शहनाई बैठा चकोर, दे रहा चेतावनी वह सोमदेव को, “रूप प्रिया का…
-
“आशीर्वाद “
महिमा नापी ना जा सकती,ऐसा अमोल है होता आशीर्वाद, असंभव को भी संभव करता,पाकर इसे सभी होते कृतार्थ ! देव,ॠषी ,नर और असुर, इससेे सभी बलशाली हैं बनते, जागृृत करती यह शक्ति अनूढी,अतुुल वीर हम बन शत्रु पछाड़ते! करती पूर्ण सबकी कामना ,शगुन भी इसमें है नित दर्शन देते, “इक्ष्वाकु-वंशज आशीष”जैसे विभीषण को लंका नृप…
-
मर्यादा
विनीत समाज में बनती जो व्यवहारिक सम्मान की सीमा! विचारों को लोकलाज से संयमित करने वाली वो शिक्षा ! दहलीज पर ही रोक दे जो आगे बढ़ते उत्श्रृंखल कदमों को! परिभाषित करे श्रीराम वनवास और सीता के तिनके को! परिवार की लज्जा का रक्षक, पहनाये कवच जो शील को ! प्रतिष्ठा का रखे देेश-मान,दिशानिर्देश दे…
-
MY FAIRY DOLL
My little honey child,you are so bright and beautiful, I know not why your grants are generously Bountiful! You stand,You turn you crawl you walk and tumble, You hum,you sing,you speak words as all in jumble! Language you speak is not native,rather to me unknown. Alike nature’s blooms in wildernesses from plants not sown! Each…
-
“मंगल सूत्र “
मंगलमय आशीष उपहार लेकरकरता सदा प्रवाहित प्रेम सागरहोता पूर्ण श्रृंगार इसे ही पाकरमनमीत पहनाता इसे पिरोकर! निभता साथ जीवन भर निरंंतर ,जोड़ता दोनों के मन का अन्तर।रहते सदा दोनों एक दूजे के होकर ,पनपता प्रिय-प्रिया स्नेह बंध कर! यज्ञसूत्र यह है पवित्र सम्बन्ध कारक्षा करता यह उसके प्राण नाथ का!मंगल करता सपरिवार यहआपका!अखंंड बनाता,सुहाग हर…
-
“सादगी”
माथे पर सिंदूरी बिंदी ,होठों पर हल्की सी हंसी,बहुत कुछ बोल जाती है उसके श्रृंगार की सादगी! उदित भास्कर चमकताहै बन उसके सुहाग की बिंदी,लगा जाती है चार चांद उसकी, सादगी की खूबसूरती! खुशी के मौके पर जब व्यस्त खुद में सब हो जाते है,ध्यान अपनी ओर खींच लेती है,उसके रुप की सादगी! रखते हैं…